इंसान की चाहत है कि उड़ने को पर मिले,
और परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले।
और परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले।
*तेरी ईद मैं मना लूं , मेरी मना ले तू दीवाली.....*
*छोड़ दे सब फसादों को , देश में होने दे खुशहाली....*
चेहरे बदल जाए तो कोई तकलीफ नहीं,
लहजे बदल जाए तो बहुत तकलीफ देते है !!